मानवा जियोन (Manva Jiyon)
By Manoj Murmu
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संताली कविता की युवा अभिव्यक्ति, आदिवासी साहित्य और भारतीय भाषाई विविधता में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए ‘मानवा जीयोन’ एक उल्लेखनीय कविता-संग्रह.
Description
‘मानवा जीयोन’ युवा संताली कवि मनोज मुर्मू का पहला कविता-संग्रह है। झारखंड के साहेबगंज निवासी मनोज की ये कविताएँ उस नई आदिवासी पीढ़ी की संवेदनाओं, स्मृतियों और सांस्कृतिक चेतना को स्वर देती हैं, जो आधुनिक समय के तीव्र बदलावों के बीच भी अपनी भाषा, समाज और जीवन-दृष्टि से गहराई से जुड़ी हुई है।
संताली भाषा में रचित और देवनागरी लिपि में प्रकाशित यह संग्रह भाषा, अस्मिता, मनुष्य और समुदाय के बीच जीवंत संबंधों को अभिव्यक्त करता है। संताली भारत की प्रमुख आदिवासी भाषाओं में से एक है और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है। इसका साहित्य देवनागरी, रोमन, बांग्ला, असमिया और ओलचिकी सहित अनेक लिपियों में विकसित हुआ है। इसी बहुल साहित्यिक परंपरा में ‘मानवा जीयोन’ एक युवा और नई आवाज़ के रूप में अपनी जगह बनाता है।
इस संग्रह का महत्त्व केवल इसकी भाषाई पहचान में नहीं, बल्कि उस संवेदनशील दृष्टि में भी है जिसके माध्यम से कवि मनुष्य, समाज, संस्कृति और सामुदायिक अनुभवों को देखता है। ये कविताएँ हमें याद दिलाती हैं कि किसी भाषा की वास्तविक शक्ति केवल उसकी लिपि में नहीं, बल्कि उसकी स्मृतियों, गीतों, ध्वनियों, कथाओं और पीढ़ियों से चले आ रहे सामुदायिक ज्ञान में निहित होती है।
‘मानवा जीयोन’ संताली कविता की युवा अभिव्यक्ति, आदिवासी साहित्य और भारतीय भाषाई विविधता में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक उल्लेखनीय प्रथम कविता-संग्रह है।
Additional information
| Weight | 0.1 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 14 × 21 cm |





